कोरोना संकट काल में प्रदूषण बड़ी समस्या, सतर्कता ही उपाय 

निर्माणाधीन महावीर चौक अंडरपास।

प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम जिला देश में पहला स्थान का तमगा हासिल कर चुका है। ठंड शुरू होते ही समस्या लगी बढ़ने पर प्रशासन के स्तर पर उदासीनता पड़ेगी भारी

मनोज कुमार तिवारी/गुरुग्राम गज़ट। 

इस वर्ष सर्दी की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। कोरोना महामारी बीच ‘ठंडी दस्तक’ ने जिस प्रकार से अचानक तापमान में भारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है उसमें प्रदूषण का रोल बड़ा है। निम्न व उच्च तापमान में 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक का भारी अंतर लोगों को बीमार बनाने के लिए काफी है। शहर में सर्दी-बुखार के मरीजों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। घर-घर बीमार लोगों की तदाद बढ़ने से सोशल डिस्टेंसिंग व अन्य जरूरी सावधानी बरतने में परेशानी पैदा होने लगी है। बाहर लोग मॉस्क लगाकर जरूर निकल रहे हैं लेकिन घर में बीमार लोगों के होने के बावजूद ऐसा नहीं हो रहा है। प्रदूषण के बढ़ते खतरे ने एक प्रकार से  ‘कोढ़ में खाज़’ की स्थिति पैदा कर दी है।

प्रशासनिक अमला असंवेदनशील, शहर भर में निर्माण कार्यों में हो रही ढिलाई

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर समाज व सरकार के स्तर पर हो-हल्ला शुरू हो गया है परंतु, स्थानीय प्रशासन के कान पर अभी तक जू नहीं रेंग रहा है। नये व पुराने गुरुग्राम में सड़कों पर उड़ रहे धूल से बचाव को कोई उपाय नहीं हो रहा है। शहर के सबसे अधििक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र सदर बाजार, बस अड्डा व महावीर चौक पर लगातार पानी का छिड़काव जरूरी है परंतु ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। महावीर चौक पर बन रहा अंडरपास बेहद मंथर गति से चल रहा है। बारिश से पहले शुरू हुए कार्य में लेटलतीफी परेशान करने वाला है। कई महीनों तक अंडरपास का एक हिस्सा खोद कर छोड़ दिया गया और ट्रैफिक डायवर्ट किए जाने के बाद भी सड़क चौड़ीकरण को समुचित ढंग से नहीं किया गया। इस हाल में पूरा क्षेत्र भयंकर धूल से भरा रहता है। निर्माण कर रही कंपनी कभी इस एरिया में पानी का बौछार नहीं करती। जीएमडीए व नगर निगम के अधिकारी भी कभी इसका सुध नहीं लेते हैं। जिला उपायुक्त भी ऑफिस से निकलकर इस तरह के कार्यों का निरीक्षण करते नहीं दिखते।

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उधर, द्वारिका एलिवेटेड एक्सप्रेसवे निर्माण कार्यों में भी भारी लापरवाही दिखने को मिल रही है। निर्माण में रत इंफ्रास्ट्रक्टर क्षेत्र की नामी कंपनी एलएंडटी भी धूल नियंत्रण को लेकर गंभीर नहीं है। लापरवाही के चलते इस कंपनी पर हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चालान भी कर चुका है परंतु स्थिति में कोई सुधार नज़र नहीं आ रहा। लोगों की लगातार शिकायतों का भी कोई मतलब नहीं रह गया है।

गुरुग्राम का एयर क्वालिटी इंडेक्स करीब 275 के स्तर पर है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 100स्तर के पार करने पर ही एयर प्रदूषण शुरू हो जाता है। दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा के मुकाबले गुरुग्राम फैला हुआ है और यहां आबादी का घनत्व भी उस स्तर का नहीं है। फिर भी, एयर प्रदूषण का यह स्तर चिंताजनक है। वैसे भी अभी तो सर्दी की शुरुआत का ही मौसम है।

स्वयं  सावधानी बरतें

-मॉस्क लगाकर ही घर से बाहर निकले। ध्यान रखें की मॉस्क मुंह व नाक को अच्छी तरह से ढका हो।

-बाहर से घर पहुंचने पर गुनगुना पानी पीयें। गुड़ का सेवन फायदेमंद रहेगा।

-किसी भी तरह के कूड़े व निस्तारित सामग्री में आग न लगाएं। प्लास्टिक तो किसी भी हालत में न जलाएं।

-धूल वाले रास्ते से जाने से बचें। घर के बाहर बने क्यारियों में पौधों पर धूल न जमने दें।

 

 

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