Sunderlal Bahuguna : पर्यावरण संरक्षण को समर्पित भारतीय सपूत को श्रद्धांजलि

सुंदरलाल बहुगुणा (फाइल)।

चिपको आंदोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा ने हिमालयन पर्वत क्षेत्र में वनों के संरक्षण के लिए महत्ती संघर्ष किया – नवीन गोयल। 

गुरुग्राम गज़ट ब्यूरो/ gurugram.

1970 के दशक में पर्वतीय क्षेत्रों में वनों के संरक्षण के लिए चिपको आन्दोलन शुरू करके पर्यावरण के प्रति अपना जीवन समर्पित करने वाले सुन्दरलाल बहुगुणा को पर्यावरण संरक्षण विभाग भाजपा हरियाणा प्रमुख नवीन गोयल ने रविवार को अपनी श्रद्धांजलि दी। चिपको आन्दोलन के कारण वे विश्वभर में वृक्ष मित्र के नाम से भी प्रसिद्ध थे।

नवीन गोयल ने कहा कि सुन्दरलाल बहुगुणा ने उस समय पर्यावरण बचाने की पहल की थी, जब पर्यावरण बहुत स्वच्छ था। आज पर्यावरण के बिगड़े हालातों में जरूरी हो गया है कि हम सब सुन्दरलाल बहुगुणा बनकर पर्यावरण बचाने को आगे आएं। पर्यावरण खराब होने का कारण हम सब हैं और हमारा कर्तव्य है कि इसमें हम ही सुधार करें। स्व. बहुगुणा ने अपना सारा जीवन पर्यावरण व अन्य सामाजिक सरोकारों को ही समर्पित किया। उनकी पत्नी विमला नौटियाल भी उनके आन्दोलन से जुड़ी रहीं।

श्री बहुगुणा 1970 के दशक से पहले वे चिपको आन्दोलन से जुड़े रहे और 80 के दशक से 2004 तक वे टिहरी बांध के निर्माण के खिलाफ विरोध करते रहे। वे देश के शुरू के पर्यावरण प्रेमियों में से एक थे। सुन्दरलाल बहुगुणा के विचारों को आगे बढ़ाते हुए नवीन गोयल का कहना है कि पेड़ों को काटने की बजाय उन्हें लगाना अति महत्वपूर्ण है। हरे-भरे जंगलों की जगह कंक्रीट के जंगल को विकास कह सकते हैं लेकिन इसे जीवन का आधार नहीं कह सकते। जीवन हमें पेड़ों से मिलेगा।

नवीन गोयल ने युवाओं का आह्वान किया है वे अपने बुजुर्गों और बच्चों के साथ अपना जीवन सही चाहते हैं तो अभी से सुंदरलाल बहुगुणा बनें। उनके बारे में पढ़ें और उनके दिखाए मार्ग पर चलें। जहां जगह मिले, वहीं पर पेड़ों के जंगल खड़े कर दें। घर, गांव, कस्बे, शहर में हरियाली बढ़ाकर जीवन दायिनी प्राकृतिक ऑक्सीजन को बढ़ावा दें। यही हम सबकी सुन्दरलाल बहुगुणा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनका निधन उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एम्स में 21 मई 2021 में कोरोना संक्रमण के कारण हुआ था।

इतिहास के दर्ज पर्यावरण आंदोलनों के बारे में श्री गोयल ने बताया कि वर्ष 1700 में राजस्थान में बिश्नोई आंदोलन, 1973 में उत्तराखंड में चिपको आन्दोलन, 1978 में केरल में साईलेंट वैली प्रोजेक्ट, 1982 में बिहार के सिहंभूम जिला में जंगल बचाओ आंदोलन, 1983 में कर्नाटक में अप्पिको आन्दोलन, 1980-90 के बीच टिहरी बांध, 1980 से अब तक नर्मदा बचाओ आन्दोलन के अलावा वर्ष 2019 में दिल्ली समेत कई महानगरों में क्लाइमेक एक्सन स्ट्राइक, 5 नवम्बर 2019 में ही इंडिया गेट दिल्ली पर सांस लेने का अधिकार आंदोलन, अप्रैल 2020 में असम में देहिंग पटकाई बचाओ आन्दोलन, 2019-20 के बीच मुंबई में आरे बचाओ आंदोलन, मई 2020 में सुन्दरबन बचाओ आन्दोलन हुआ था।

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